Rohitas Ghorela

wanna be a writer and Poet. "I'm gonna fall in love with you. You don't have to love me back, just let me love you."

Saturday, 24 December 2011

दिल मेरा...!

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विरान खंडरों की तरह पड़ा हैं दिल मेरा आज खुबसुरत कहने आई इस खंडर को,    वर्षों पहले कभी मंजिल को तरसा दिल मेरा आज तुं भी चल पड़ी अनजाने ...
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Saturday, 3 December 2011

प्यासी नज़र

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मेरी नज़रों का क्या कसूर नज़रों  से नज़र तुने जो मिलाई हैं नजरो को मिला हैं जेसे कोई प्यार ये नज़रों की गहराई हैं हाय रब्बा...! इन कात्त...
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Thursday, 17 November 2011

प्रेम तस्कर

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मेरे दिल में उतर कर तो देखते ऐसा मंजर कभी देखा नहीं होगा कभी मेरी आँखों में झांक कर तो देखते की सपनों में भी आंसुओं का सागर देखा नहीं हो...
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Saturday, 12 November 2011

प्यार भरा दिखावा

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पल भर की हसीं बातों से ये दिल प्यार में जलने लगा आ जाओ ना पास पल-पल यूँ दिल जलाते हो क्यों अपनी नजरों से बांध कर मुझे मेरी ही नज़रों में ...
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Saturday, 8 October 2011

मुसाफ़िर

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कभी तु मंजिल थी मेरी अब मंजिल कोई नई ढूंढने चले हैं, तेरी हर अदा ने किया था कायल अब इसी अदा से नाकारा चले हैं, गम के मारे जो मुस्कुरा...
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Thursday, 6 October 2011

अपनी शिक्षा पद्धति

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बड़ी मुश्किलों से एक बच्चा पढ़ना होता था सब बड़े छोटों को खेतो में काम करना होता था, पढ़ने वालों में मेरा नाम शामिल था सब भाई बहिनों में...
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Sunday, 2 October 2011

शिक्षा- शिक्षक के बारे में

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आज की तरह नही थे शिक्षक, शिक्षक नही गुरुदेवों का ज़माना था, दीपावली के बाद शर्दियों के दिन थे शाम को गुरु जी का स्कूल में बुलाना था, शाम का...
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Monday, 26 September 2011

तमन्ना व शपथ

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तुम ज्वाला हो तो मै बर्फ हूँ तुम्हारे पास से गुजरूँ तो पिंघल जाऊँ, तुम फूल हो तो मै पत्थर दिल हूँ अगर तुम चाहो तो खुसबू भी बन जाऊँ, तुम ...
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Wednesday, 21 September 2011

अनोखी ऋतूवें

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बसंत के पीले कपड़ों को जांबाज़ पहन के निकले थे  मर मिटने के उस रंग को इक शाम पहन के निकले थे, भर जोश कदम से बढ चले अपने वतन...
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Sunday, 18 September 2011

आदर्णीय अजमल कसाब-तेरी ओकात

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सौचता हैं आंतकी जब वह थक जाऐ की भारतीय जेलों में आराम फ़रमाया जाऐ, जेलों में सेवा होती है इनकी मेहमानों की तरह की खातेदारी में कोई उनकी कमी...
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Rohitas Ghorela
रोहिताश घोड़ेला: बदलाव के लिए लिखना पसंद करता हूँ. पुराने जज्बात को जो बारम्बार लिखे जा चुके हैं उनको नये अल्फाज में लिखने से परहेज है. महफ़िल में अक्सर तन्हाई गजल सूना जाती है और तन्हाई में कोई कविता जन्म ले लेती है. कभी जानबूझ कर लिखने की कोशिश तक नहीं करने की आदत है............... "सरहाना नहीं चाहता किसी से, बस मोहब्बत कर लो मुझी से"
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