Rohitas Ghorela

wanna be a writer and Poet. "I'm gonna fall in love with you. You don't have to love me back, just let me love you."

Wednesday, 13 November 2019

ख़ाका

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पुरानी डायरी से कुछ पंक्तियाँ:   १  एक डायरी लिखने का शौक था  पन्ने दर पन्ने तुझे मुकम्मल करना था  तू जाती रही  सब जाता रहा ...
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Wednesday, 6 November 2019

जागृत आँख

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क्या ही इलाज़ करें खुद का खुदी से हो नहीं सकता बुलन्द इतना सहारा मिले तो मिले सकूं झर रहा है इंसां गिर गए नाखून पिंघल रही उंगलियां रीत...
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Wednesday, 30 October 2019

कविता

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मैं बाहर निकलता हूँ और उठा लेता हूँ  किसी की भावना से  खेलता हुआ विषय  जिस पर कविता बननी होती है  मैं अपराधी हूँ कविता तेरा  जो...
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Thursday, 17 October 2019

लोग बोले है बुरा लगता है

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जो अच्छी लगती, बुरा नहीं लगता रूह से जा लगती, बुरा नहीं लगता क्यों न हो तुझ में कोई खामी मुझी से हो पुरी बुरा नहीं लगता वहशत न...
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Friday, 11 October 2019

ख़ुदा से आगे

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अभी तो मैं ख़ुदा तक  हूँ  आँखों में नूर ज्योत्स्ना सा, मन कोमल,निर्मल,दिलनवाज़ी, मंद मंद मुस्कुराहट व लावण्य  जब भी सुनूं आहट जानी-प...
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Saturday, 5 October 2019

अश्विनी: परिचय (न्यू ब्लोगर)

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वैसे तो कोई भी शख़्स का परिचय देना महज एक औपचारिकता है क्यूंकि वही शख़्स आने वाले वक्त में अपने कर्मों से पहचाना जायेगा। इसी पर ग़ालिब सा...
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Friday, 27 September 2019

शून्य पार

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फ्रॉम गूगल इमेज   खुद ही को खोकर  पूर्णता,लक्ष्य हासिल करना या जिसे जीना समझे हैं हम   महज मरने की प्रक्रिया थी पल पहले जो भ...
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Thursday, 19 September 2019

अंदाजे-बयाँ कोई और

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फ्रॉम गूगल इमेज  कब तलक  हक़  जमाओगे, है  कोई और दम निकलेगा तभी मानोगे था कोई और जबरन  ब्याही  गयी  संग  कोई   और पखेरूओं  की  ...
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Monday, 5 August 2019

कायाकल्प

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जब 'यह' क्रूर या निर्दयी है  तब उन लोगों ने किनारा किया  जिन्होंने मेरे शानदार दिनों में  अपना भरण पोषण करवाया  छ...
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Sunday, 20 January 2019

ठीक हो न जाएँ

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from गूगल image  एक लिबास पहने दुनियां चल रही है कहीं हमारी, कहीं तुम्हारी चल रही है मैं बड़ा खौफज़दा हूँ इन दिनों उनसे और उ...
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Rohitas Ghorela
रोहिताश घोड़ेला: बदलाव के लिए लिखना पसंद करता हूँ. पुराने जज्बात को जो बारम्बार लिखे जा चुके हैं उनको नये अल्फाज में लिखने से परहेज है. महफ़िल में अक्सर तन्हाई गजल सूना जाती है और तन्हाई में कोई कविता जन्म ले लेती है. कभी जानबूझ कर लिखने की कोशिश तक नहीं करने की आदत है............... "सरहाना नहीं चाहता किसी से, बस मोहब्बत कर लो मुझी से"
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