Thursday, 10 January 2019

हिंदी




                                         "माँ
                                         गर तू न होती
                                         मैं तो गूंगा होता,
                                         मेरे अक्लोहोश की कोई बुनियाद होती!? "
                                                                                              -Rohit

6 comments:

  1. हिन्दी
    माँ
    गर तू न होती
    मैं तो गूंंगा होता,
    मेरे अक्लोहोश की कोई बुनियाद होती!?
    बेहतरीन
    सादर

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  2. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शुक्रवार (11-01-2019) को "विश्व हिन्दी दिवस" (चर्चा अंक-3213) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  3. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 11/01/2019 की बुलेटिन, " ५३ वर्षों बाद भी रहस्यों में घिरी लाल बहादुर शास्त्री जी की मृत्यु “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  4. छोटे डब्बे में कस्तुरी ।
    आस्था की महक।
    अप्रतिम ।

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  5. तील हम है,
    और गुड़ हो आप,
    मिठाई हम है,
    और मिठास हो आप,
    इस साल के पहले त्योंहार से
    हो रही आज शुरुआत…
    आपको हमारी ओर से परिवार सहित
    मकर संक्रांति की शुभकामनाये !!

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  6. माँ ....
    इसके होने से ही संसार है ... शब्द हैं ... जीवन हैं ...

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