Saturday, 15 December 2012

नम मौसम, भीगी जमीं ..

 
सर्दी की लम्बी काली रातें
तन्हाइयां और
घड़ी की टक..टक..टक

सुबह तलक, क़हरे-हवा  
बबूल से टपकती
शबनमी बूंदें टप..टप..टप
नम मौसम, भीगी जमीं।

      By:-
**रोहित**

क़हरे-हवा=यादों का क़हर (कविता के अर्थ में) / हवा की विपदा (शाब्दिक अर्थ) 

40 comments:

  1. वाह मित्र सत्य का यह सुन्दर रूप लाजवाब प्रस्तुति

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  2. बहुत सुन्दर.....कोमल भाव...

    अनु
    (पहली पंक्ति में टाइपिंग की गलती है,"सर्दी" कर लीजिए.)

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    1. मैंने मेरी गलती सुधार ली है..आपका बहुत बहुत धन्यवाद अनु दी :)

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  3. गहन एहसास ...हृदयस्पर्शी अभिव्यक्ति ....
    शुभकामनायें ...

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  4. सुन्दर रचना
    उच्चारण पर ध्यान दें

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  5. बहुत बढ़िया प्रस्तुति!

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  6. सर्दी की रातें....बढ़ि‍या

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  7. सुबह तलक, क़हरे-हवा
    बबूल से टपकती
    शबनमी बूंदें टप..टप..टप
    नम मौसम, भीगी जमीं।

    बहुत ख़ूब.......

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  8. संक्षिप्त किन्तु प्रभावपूर्ण ..

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  9. संक्षिप्त लेकिन अपने में पूर्ण..सुन्दर प्रस्तुति..

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  10. विजय दिवस की हार्दिक बधाइयाँ - ब्लॉग बुलेटिन आज की ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  11. बहुत सुन्दर....
    :-)

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  12. सुन्दर चित्र के संग भाव कनिका ,अभिनव समेटे अपने छोटे से कलेवर में .

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  13. बेजोड़ भावाभियक्ति....

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  14. प्रभावपूर्ण सुन्दर प्रस्तुति..सर्दी की लम्बी काली रातें
    तन्हाइयां और
    घड़ी की टक..टक..टक

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  15. सुन्दर प्रस्तुति प्रभावपूर्ण ****^^^^^****
    Reply.सर्दी की लम्बी काली रातें
    तन्हाइयां और
    घड़ी की टक..टक..टक

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  16. बहुत सुंदर !
    ~God Bless!!!

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  17. बाहर अन्दर का सन्नाटा ,सुन्नी तन और मन की एकाकार हो जाती है ,यादों से सराबोर भी .

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  18. आखिरी चार लाइने मर्मस्पर्शी हैं साधुवाद आपको इतनी सुंदर लेखनी के लिये

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  19. what a beautiful line..
    शबनमी बूंदें टप..टप..टप
    नम मौसम, भीगी जमीं।
    thnx for sharing.......Rohitas bhai

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  20. शबनमी बूंदें टप..टप..टप
    नम मौसम, भीगी जमीं।
    atisundar bhav abhivyakti....

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  21. गागर में सागर सुन्दर बिम्बों के माध्यम से अपने एहसासों को धीमे धीमे उजागर करते शब्द

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  22. बढ़िया रचना | दिल की बातों को व्यक्त करती सुंदर प्रस्तुति |

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  23. थोड़े अल्फाज, सुन्दर भाव !

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  24. राष्ट्र सारा उद्वेलित है रोहितास जी , क्या टिपण्णी करें .

    कभी लिखा गया था -

    बाप बेटा बेचता है ,बाप बेटा बेचता है ,

    भूख से बेहाल होकर राष्ट्र सारा देखता है .

    दुर्भिक्ष पर ये पंक्तियाँ लिखी गई थीं कभी आज वहशियों ने जो दिल्ली में किया है उसने भी वैसी ही छटपटाहट पैदा की है राष्ट्र में लेकिन मनमोहन जी की नींद तब खराब होती है जब ऑस्ट्रेलिया में संदिग्ध अवस्था में कोई मुसलमान पकड़ा जाता है यह है सेकुलर चरित्र इस सरकार का औए एक अदद राजकुमार का जो कलावती की दावत उड़ाने फट पहुंचता है लेकिन फिलवक्त इस कथित युवा को सांप सूंघ गया है .

    सोनिया जी जिनका भारत पे राज हैं खुद परेशान हैं क्या करूँ इस मंद बुद्धि का जो गत बरसों में वहीँ का वहीँ हैं ,इससे तो प्रियंका को लांच लरना था .

    बलात्कृत युवती से उनका क्या लेना देना .कल बीस तारीख है इनका गुजरात से सूपड़ा साफ़ हो जाएगा और एक अदद राजकुमार की नींद उड़ जायेगी .

    एक टिपण्णी ब्लॉग पोस्ट :


    Saturday, 15 December 2012

    नम मौसम, भीगी जमीं ..

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  25. ख्याल बहुत सुन्दर है और निभाया भी है आपने उस हेतु बधाई, सादर वन्दे,,,,,,

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  26. भावों का बहुत सुन्दरं चित्रण..

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  27. बहुत सुन्दर भावों का चित्रण....:)

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  28. wahh...Bahut khoob..
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