Thursday, 9 October 2014

सब थे उसकी मौत पर (ग़जल 2)




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प्यार  की नियत, सोच, नज़र  सब  हराम  हुई
इसी सबब से कोई अबला कितनी बद्नाम हुई.

इंतजार, इज़हार, गुलाब, ख़्वाब,  वफ़ा,  नशा
उसे पाने की कोशिशें तमाम हुई सरेआम हुई

नहीं,तेरा पलट के देखना, तेरा पुकारना बरमल्ला
अपनी  मोहब्बत तो  तेरे चले  जाने  से आम  हुई

बढ़ी हुई  दूरियां  मोहब्बतों  में  तब्दील  हो गयी 
बच्चपन तो बच्चपन था जवानियाँ नीलाम हुई 

सब थे उसकी मौत पर आये हुए जो दिन में मरी 
न था तो कोई उस मौत पर जो उसे हर शाम  हुई.

"रोहित"

37 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (10.10.2014) को "उपासना में वासना" (चर्चा अंक-1762)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, चर्चा मंच पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।दुर्गापूजा की हार्दिक शुभकामनायें।

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    1. आपका बहुत बहुत आभार वीर जी

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  2. इंतजार, इज़हार, गुलाब, ख़्वाब, वफ़ा, नशा
    उसे पाने की कोशिशें तमाम हुई सरेआम हुई------ वाह !!! प्रेम की सुंदर और कोमल गजलनुमा रचना --
    उत्कृष्ट प्रस्तुति
    बधाई


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  3. वाह.... बहुत उम्दा ग़ज़ल ....

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  4. Itna sab paane ki koshish wo bhi sareaam .. Maare jaayenge :) bahut hi lajawaab bhivyakti aanand aaa gya pdhke beshk !!

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    1. मारे जायेंगे नहीं मारे गये कहो :) :)

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  5. बढ़ी हुई दूरियां मोहब्बतों में तब्दील हो गयी
    बच्चपन तो बच्चपन था जवानियाँ नीलाम हुई

    बचपन तो बचपन था सुन्दर प्रयोग

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  6. बहुत सुंदर गजल.रोहित जी!
    धरती की गोद

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  7. 'न था तो कोई उस मौत पर जो उसे हर शाम हुई.''.......जो शायद इस मौत से भी कई गुना तकलीफ़देह थी !!!!!
    दर्पण सरीखी रचना !

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  8. शब्द जैसे ढ़ल गये हों खुद बखुद, इस तरह गजल रची है आपने।

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  9. आभार आपका भाई जी-
    बढ़िया रचना-सुन्दर भाव-
    बधाइयां-

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  10. मैं कुछ ना कह सकी
    शब्द उचित मिल न सके

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  11. बहुत खूब ... उम्दा शेर हैं सभी इस ग़ज़ल के ...

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  12. वाह !
    बेहतरीन

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  13. सब थे उसकी मौत पर आये हुए जो दिन में मरी

    न था तो कोई उस मौत पर जो उसे हर शाम हुई.
    ....वाह...लाज़वाब अहसास...

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  14. नहीं,तेरा पलट के देखना, तेरा पुकारना बरमल्ला
    अपनी मोहब्बत तो तेरे चले जाने से आम हुई
    ..बहुत खूब .

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  15. बहुत ही शानदार और भावपूर्णं रचना। दिल में गहरी उतर गई यह रचना। अच्छे लेखन के लिए आपको बहुत बहुत बधाई।

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  16. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना हमारे सोमवारीय विशेषांक ७ मई २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  17. वाह!!लाजवाब ग़ज़ल !!

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  18. उम्दा लेखन रोहितास जी...

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  19. मृम को छूती गजल ।
    बेहतरीन ।

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  20. मृम को छूती उम्दा गजल।
    बेहतरीन।

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  21. एक उम्दा ग़ज़ल बहुत दिनों बाद पढ़ी। दिल तक सीधे रास्ता बना लेने वाली पंक्तियां।
    सादर

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  22. लाजवाब गजल...
    एक से बढ़कर एक शेर....
    वाह!!!!
    नहीं,तेरा पलट के देखना, तेरा पुकारना बरमल्ला
    अपनी मोहब्बत तो तेरे चले जाने से आम हुई
    वाहवाह...

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  23. नहीं,तेरा पलट के देखना, तेरा पुकारना बरमल्ला
    अपनी मोहब्बत तो तेरे चले जाने से आम हुई
    सब थे उसकी मौत पर आये हुए जो दिन में मरी
    न था तो कोई उस मौत पर जो उसे हर शाम हुई.- बहुत ही लाजवाब अशार| सभी अपनी कहानी आप कह रहे हैं | उम्दा लेखन प्रिय रोहिताश जी | इस मंच के उम्दा गजलकारों में एक और से परिचय मेरा सौभाग्य !!आपको मेरे हार्दिक शुभकामनायें स्वीकार हो |

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  24. बेहतरीन रचना....बहुत बहुत बधाई

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