Wednesday, 19 September 2018

आत्मसात

चलो ले चलता हूँ 
घिसे-पिटे हवाई पट्टी से 
एक घाटी की जानिब.
होंगी तुझे आसमां की चाह 
मगर ये भी चाह निज मन की नहीं
हवाबाज़ी है सो बहकावे हैं भ्रम है
या भागना है निज पीड़ा से.
व्यर्थ की कोशिश है
उड़ने को पंख तुझे मिले ही नहीं.

उड़ान तो निजत्व से झगड़ा है 
होना है आत्मसात तो गहराई में उतर. 
संदली हवा मदहोश करे है 
एक प्रेरणा उतरते जाने की.
यहाँ मिलो दर्द से गले तुम 
बैचेनियों की दरिया में गोते लगाओ 
जहाँ अथाह शांति है 
और गहरे में उतरते राह पर  
थकान को भी आराम करते पाओ 
अब गुलों में अजब सुगंध है
पतों की सरसराहट भी धुन है.

जब कल का महसूस होना 
आज दिखाई देने लगे-
शरीर कुछ त्याग रहा 
ग़म ,परेशानी,पीड़ा,विचार 
सब बीती बातें हुईं 
गहराई के घोर अंधकार में 
जो खो गयीं.
बोझ छंटने लगा
बाद इसके शरीर भी छूट गया 
पार तुमने पा लिया 
प्रकाश पुंज सामने है 
अब जो तुम हो 
बहिष्कृत इंसा 
पारदर्शी बुद्धत्व प्राप्त
ज्ञान रहित.

by 
-रोहित 






21 comments:

  1. सुंदर भाव दर्शाती बेहतरीन रचना

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  2. बहुत खूब ...
    बहरीन आध्यात्मिक भाव लिए ... गज़ब ...

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  3. गहराई लिये हुऐ एक सुन्दर अभिव्यक्ति।

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  4. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन कुंवर नारायण और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  5. बेहतरीन भावों से सजी प्रभावपूर्ण अभिव्यक्ति ।

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  6. बेहतरीन भावों का निदर्शन कराती उत्तम रचना

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  7. बेहतरीन भावों का निदर्शन कराती उत्तम रचना

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  8. वाह रोहितास भाई क्या लिख दिया हैं एक अनंत एक ख्वाब एक उम्मीद को पाने की कहानी हैं ये नज़म।

    जब कल का महसूस होना
    आज दिखाई देने लगे-
    शरीर कुछ त्याग रहा
    ग़म ,परेशानी,पीड़ा,विचार
    सब बीती बातें हुईं

    ग़ालिब का एक शेर याद आता हैं
    "मुश्किलें इतनी पड़ी मुझपेके आसा हो गयी'
    पा लिया सबकुछ तो कुछ पाना कैसा।ऐसे ही कुछ अनकहे प्रश्न हैं।बहुत बढ़िया लिखा हैं जनाब।बधाई।

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  9. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २१ सितंबर २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  10. उड़ान तो निजत्व से झगड़ा है
    होना है आत्मसात तो गहराई में उतर.
    .
    बहुत ही गहरे उतरते भाव आदरणीय, उम्दा सृजन

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  11. सुंदर भावों से सजी बेहतरीन रचना आदरणीय

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  12. उड़ान तो निजत्व से झगड़ा है
    होना है आत्मसात तो गहराई में उतर.
    वाह!!!
    लाजवाब रचना आध्यात्मिक भाव लिए....
    वाह!!!

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  13. उड़ान तो निजत्व से झगड़ा है
    अहा! दर्शन से भरी उत्कृष्ट अभिव्यक्ति

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  14. वाह..भावपूर्ण रचना, एक पल ऐसा भी होता है जब उड़ान और गहराई एक हो जाते हैं..

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  15. उड़ान तो निजत्व से झगड़ा है
    होना है आत्मसात तो गहराई में उतर.
    संदली हवा मदहोश करे है
    एक प्रेरणा उतरते जाने की.
    यहाँ मिलो दर्द से गले तुम
    बैचेनियों की दरिया में गोते लगाओ
    जहाँ अथाह शांति है !!!!!
    बहुत ही नया जीवन दर्शन जाना आज आपके शब्दों के माध्यम से - प्रिय रोहित जी | बहुत ही अनुपम भाव है सचमुच उड़ान एक जिद ही तो है असलियत तो गहराइयों में छिपी होती है | कुछ नया ले जाते हुए आपको मेरी ढेरों शुभकामनायें !!!!!!!!

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  16. उड़ान तो निजत्व से झगड़ा है
    होना है आत्मसात तो गहराई में उतर.

    बेहतरीन रचना 👌

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  17. भावपूर्ण सुंदर प्रस्तूति।

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  18. सुन्दर अभिव्यक्ति...

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  19. ज्ञान रहित या फिर केवल्य ज्ञान, अज्ञान से रहित शुद्धतम।
    अप्रतिम।

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    1. ज्ञान रहित ही सही है

      आभार

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