Wednesday, 13 November 2019

ख़ाका

पुरानी डायरी से कुछ पंक्तियाँ:

  १ 
एक डायरी लिखने का शौक था 
पन्ने दर पन्ने तुझे मुकम्मल करना था 
तू जाती रही 
सब जाता रहा
हम जो रहेंगे झुंझलाहट लिए,
हम जो हैं गुजरे लम्हों के ख़ाका मात्र,
हम जो हैं  लबों में कुलबुलाहट सिये, 
आजीवन छटपटाहट, एक लम्हे का फैसला मात्र । 
             
  २ 
जी का ना लगना 
बेसब्री का सहारा मिलना 
तमाम होना तमाम बातों का 
             
          
   ३ 
जमाने को मैंने देखा इस तरह 
आँखों में गिरी सूरज की किरणें 
थोड़ी सी जली लेकिन 
                            चमकदार हो गयी ।                                                
          
  ४ 
जिसने एक बार 
सफल होने की 
नाकाम कोशिश की हो 
उसके यहां 
धूल फांकती है मोहब्बत । 

                                   - रोहित 

19 comments:

  1. भावुक करती वेदनाओं से भरी डायरी। खाली पन्नों से झांकती उनकी तस्वीर,अधूरी सी तावीर...परेशान तो करेगी ही। शुभकामनाएं ।

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  2. बेहतरीन अभिव्यक्ति..हर बंध शानदार है तीसरा बंध मुझे बहुत पसंद आया।

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  3. नमस्ते,

    आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" में गुरुवार 14 नवंबर 2019 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!


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  4. अक्सर कुछ रह जाता है ...उन बचीं यादों को डायरियों में समेट लेना चाहिए.. डायरी जब तक नष्ट नहीं होगी तब तक वहां सारे एहसास सुकून से जिंदगी बसर करेंगे बहुत खूबसूरत लिखा आपने

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  5. अद्भुत प्रस्तुति 👌👌

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  6. हम जो हैं  लबों में कुलबुलाहट सिये, आजीवन छटपटाहट, एक लम्हे का फैसला मात्र 

    हम्म्म्म। ..उसी कुलबुलाहट ने खुद को अब रचनाओं में BADAL लिया है  इक  सकारात्मक मस्तिष्क की यही पहचान होती  हैं  वो अपनी हर छटपटाहट को शब्दों में पिघला कर रचना  में ढाल स्वर्णिम अनुभूति बना देता हैं 

    जमाने को मैंने देखा इस तरह
    आँखों में गिरी सूरज की किरणें
    थोड़ी सी जली लेकिन
    चमकदार हो गयी ।

    SEE THAT WHAT I MEANT

    बधाई। ..डायरी के पन्ने सम्भले ना सम्भले डायरी का मिज़ाज़ संभाले रखियेगा 

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  7. जिसने एक बार
    सफल होने की
    नाकाम कोशिश की हो
    उसके यहां
    धूल फांकती है मोहब्बत ।
    Lazbaab

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  8. Beautiful thoughts and presentations...

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  9. अलहदा उपमाओं से सज्जित उम्दा प्रस्तुति।
    बहुत गहन एहसासों का सृजन।

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  10. मुहब्बत, धूल फांकेगी, बड़ा ही ख़ुश्क़ सपना है,
    क्या मजनूँ की तरह, हमको भी, सहराओं में तपना है.

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  12. प्रिय रोहितास , डायरी के पन्ने खुले तो , मधुर यादों की सुगंध में सराबोर
    अनमोल मोती निकले !आपकी रचना के रूप में ये शानदार मुक्तक अपनी मिसाल आप हैं , तीसरे और चौथे के लिए तो वाह के अलावा कुछ नहीं .अपनी डायरी के पन्ने खोलते रहिये , मेरी हार्दिक शुभकामनायें आपके लिए

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  13. वाह ... क्या बात है इन पन्नों की ...
    अलग मूड में डूब कर लिखी बातें ... तमाम को समेटता पन्ना ... फिर मुहब्सोबत की दास्ताँ ... सच में तमाम कर गया ... बहुत लाजवाब ...

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  14. वाह क्या कहने ... बेहद शानदार और धारदार जज्‍बातों से लबालब है सुंदर रचना

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  15. वाह बेहतरीन रचना भाव अनुपम

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